आज के इस आर्टिकल में मै इस्लाम धर्म के सबसे बड़े तैयोहर – Ramzan Ka Roza Ki Vishesh Jankaari अपडेट करुँगी|

दोस्तों सबसे पहले मै आपको यह बता दूं की इस्लाम धर्म है या मुस्लिम धर्म दोनों एक ही धर्म को कहा जाता है| जैसा की मैंने ऊपर बताया रोज़ा इस धर्म का सबसे बड़ा त्यौहार तो दोस्तों इस लेख में हम इसके नियम के बारे में विस्तार में जानेंगे|

दोस्तों अगर आपको अभी तक नीचे लिखे हुए पर्श्नो के उत्तर नहीं पता है तो आप इस लिख को आखिर तक ज़रूर पढ़े| आइये सबसे पहले हम प्रशन पढ़ लेते हैं –

  • रमजान का महत्व –
  • रमजान क्या है?
  • रमजान (Ramzan ka roza) के महीने में क्या होता है?
  • रमजान का इतिहास
  • कैसे किया जाता है रमजान में रोज़ा?
  • रमजान के रोज़ा रखने के नियम?

Ramzan Ka Roza Ki Vishesh Jankaari – इस्लाम धर्म का सबसे बड़ा तैयोहर

दोस्तों इस लेख के आखिर तक मै रमज़ान और रोज़े से जुड़े हर प्रशन का उत्तर आपको दे दूंगी| तो चलिए दोस्तों सबसे पहले हम जान लेते हैं की आखिर रमजान का महत्व क्या है?

रमजान का महत्व –

भारत एकमात्र ऐसा देश है जहा कई तरह की संस्कृत्यो का मेल है| सभी संस्कृति का मान्यता भले ही अलग-अलग है लेकिन सभी का मकसद प्रेम और करुना ही है| बस सभी त्यौहार को मनाने का तरीका अलग-अलग है, और दोस्तों इसलिए भारत के कई त्यौहार विदेशो में भी प्रसिद्ध हैं|

cहमारे भारत देश में कई कैलेंडर होते हैं, सभी धर्मो के अपने अलग-अलग महीने होते है और उसमे परम्पराये और मान्यताये भी सम्मिलित होती है लेकिन सभी का उदेश्य एक ही है और वो ख़ुशी और एकता होती है|

ठीक उसी तरह रमजान का भी अपना एक अलग महत्त्व होता है, और सभी इस्लामिक देशो में बड़े शोरो से मनाया जाता है| रमजान का महत्व भारत में मुस्लिम संभवतः है|

चलिए दोस्तों हम जान लेते है कि आखिर रमजान क्या है?

यह मुस्लिम संस्कृति का सबसे महान महिना होता है जिसके नियम बहुत ही कठिन होते हैं जो इन्सान के अंदर की सेहन्सिलता को बढाता है|

रमजान का माह बहुत ही पवित्र माना जाता है और ये इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से नौबे महीने में आता है|

दोस्तों यह तो हम सभी जानते हैं की मुस्लिम धर्म में चाँद का बहुत महत्व है| इस्लामिक कैलेंडर में चाँद के अनुसार महीने गिने जाते हैं, जो की 30 या 29 होते हैं|

इस तरह से 10 दिन कम होते जाते हैं और रमजान का महिना भी इंग्लिश कैलेंडर के मुताबिक 10 दिन पूर्व ही आ जाता है|

रमजान के महीने को बहुत ही पावन माना जाता है, और रमजान अपने कठोर नियमो की वजह से पुरे विश्व में जाना जाता है|

चलिए जानते हैं कि आखिर रमजान (Ramzan ka roza) के महीने में क्या होता है?

दोस्तों रमजान के दिनों की चमक देखते ही बनती है, पूरा महिना मुस्लिम इलाके में बहुत चमक-धकम और शोर-शराबा भी रहता है| सब एक दुसरे से प्रेम से मिलते हैं और एक दुसरे से सारे गिले शिकवे दूर करते हैं|

रमजान का इतिहास – कब और कैसे रमजान की शुरुआत हुई?

इस रमजान के महीने को शब् एक्दर कहा जाता है, मान्यता यह है की अल्लाह (इस्लाम धर्म के भगवन) ने इसी दिन अपने बन्दों को कुरान शरीफ से न्माज़ा था|

और दोस्तों यही वजह है कि इस महीने को पवित्र माना जाता है और अल्लाह के लिए रोज़ा अदा किया जाता है|

रोज़ा का वर्त हर मुस्लिम परिवार के छोटे से छोटा बच्चा और बड़े बूढ़े सदस्य भी शिद्दत से निभाता है|

कैसे किया जाता है रमजान में रोज़ा – (Ramzan ka roza)

रमजान के दिनों में रोज़ा का वर्त रखा जाता है जिसे अल्लाह की इबादत कहते हैं| दोस्तों रोज़ा करने के बहुत सारे नियम है, आइये जान लेते हैं उन नियमो को –

  • सोहरी रोज़ा

इसको रखने के लिए सुर्युदय से 1.5 घंटे पहले उठाना होता है| और कुछ खाने के बाद ही रोज़ा शुरू होता है| फिर उसके बाद पुरे दिन न तो कुछ खा सकते हैं और ना ही कुछ पी सकते हैं|

  • इफ्तार रोज़ा

इसको करने के लिए शाम में सूर्यास्त होने के पश्चात कुछ समय के बाद रोज़ा खोला जाता है, जिसका समय निश्चित होता है|

  • तरावी रोज़ा

यह रात में एक निचित समय पर तरावी की नमाज़ को पढ़ा जाता है, यह समय लगभग 9 बजे का होता है| साथ ही इस वक़्त मस्जिदों में कुरान भी पढ़ी जाती है| ऐसा पुरे रमजान यानिकी पुरे 29 या 30 दिन तक ऐसे किया जाता है|

और इसके बाद दोस्तों एक माह के कठिन परिश्रम के बाद आती है ईद जो की खूब ज़ोरो-शोरो से मनाया जाता है|

रमजान के रोज़ा रखने के नियम – Ramzan Ka Roza Ki Vishesh Jankaari

दोस्तों मैंने आपको ऊपर ही बता दिया कि रोज़ा के नियम पूरी दुनिया में बहुत ज्यादा चर्चित है| चलिए जानते है कि आखिर क्या है इसके नियम –

रमजान के नियम बहुत ही कठिन होते हैं, कहते है कि

  • इन दिनों इन्सान और भगवन के बिच की दूरियाँ कम होती है|
  • इंसानों में एकजुट की भावना बढती है|
  • अल्लाह पर विश्वास पक्का होता है|
  • रमजान में एकता की भावना बढती है|
  • अल्लाह का नाम लेना, कलाम पढना इन दिनों के महतवपूर्ण काम है|

कहा जाता है कि इन दिनों गलत आदतों से दूर रहने की इदायत दी जाती है और इसके लिए ख़ास निगरानी भी राखी जाती है| हर तरह के नशे से दूर रहने की शक्ति की जाती है|

इतना ही नहीं दोस्तों यहा तक की गलत बोलने, देखने और सुनने की मनाई की जाती है| और साथ ही मार पिट से भी दूर रहा जाता है| लड़ाई में हाथ पैर का इस्तेमाल रमजान का उलंघन माना जाता है|

औरतो के प्रति अच्छे विचार रखना ज़रूरी है, अपनी पत्नी और दूसरी औरत पर भी गलत निगाह डालना भी पाप का प्रतीत है|

इन दिनों दान देने को बहुत पुन्य का काम मन जाता है, सभी को अपने श्रधा के अनुसार इस काम को करना होता है|

इन दिनों लोगो को उनकी गलती को अपनाने के लिए कहा जाता है, ताकि वो उसके लिए माफ़ी मांग सके और अपने दिल के बोझ को हल्का कर सके| सभी वयक्ति जो रोज़ा रखते हैं वो अल्लाह से जन्नत की दुआ करते हैं|

कई कारणों से काफी लोगो के लिए रोज़ा रख पाना संभव नहीं होता है, तो उसके लिए कई तरह से उनको छुट भी दी जाती है, जैसे की

  • घर में जो भी 5 वर्ष से छोटे बच्चे हैं उनको रोज़ा रखने की म्नाहट होती है|
  • अगर कोई बहुत ज्यादा वृद्ध व्यक्ति रोज़ा रखना नहीं चाहता है तो कोई परेशानी नहीं है उनको इसके लिए छुट मिलती है|
  • अगर कोई बीमार है, कोई गर्ववती महिला या बच्चे को दूध पिलाने वाली महिला को भी रोज़ा की मनाई होती है|

इस्लाम धर्म के मुताविक मुसलमान शब्द यानी की मुसल + आन यानिकी जिसका ईमान पक्का हो, जिसके लिए उनको कुछ नियमो को समय पर पूरा करना होता है|

ज़रूर पढ़े –

सदियों से चली आ रही हिन्दू और मुस्लिम के बिच की लड़ाई को भी भगवान और अल्लाह अपने बच्चो के बिच प्रेम तक को अनदेखा कर देती है|

दोस्तों मेरा ramzan ka roza का ये लेख यही पर समाप्त हो रहा है| आशा है इस ramzan ka roza के लेख में आपको रोज़ा से जुडी सभी जानकारी मिल गई होगी| दोस्तों अगर मुझ से कोई पॉइंट छुट गया है तो आप मुझे कमेंट कर के बता सकते हैं|

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